Published July 30, 2015 | Version v1
Journal article Open

नैतिकता के अभ्युपगम

Authors/Creators

Description

सामान्यतः मनुष्य का यह स्वभाव है कि वह किसी भी कार्य या शास्त्र में कतिपय अभ्युपगम को दृष्टिगत रखते हुए ही प्रवृत्त होता है, जो उस कार्य या शास्त्र के लिए पृष्ठभूमि रूप होते हैं। नैतिकता के संदर्भ में भी यही स्थिति है। नैतिकता की भी कुछ आधारभूत पूर्वधारणाएँ हैं, जिनके अभाव में नैतिक आचरण अर्थहीन हो जाता है। इसलिए भारतीय दर्शन में आत्मा की अमरता, कर्म एवं पुनर्जन्म, ईश्वर का अस्तित्व एवं संकल्य स्वातन्त्र्य को स्वीकार किया गया है। पाश्चात्य विचारक कांट ने भी आत्मा की अमरता, ईश्वर का अस्तित्व और संकल्प स्वातन्त्र्य को नैतिकता की आधारशिला माना है। प्रस्तुत शोधपत्र में नैतिकता के इन्हीं अभ्युपगमों पर विश्लेषणात्मक विचार प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

 

Files

नैतिकता के अभ्युपगम.pdf

Files (1.4 MB)