आधुनिक शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश
Authors/Creators
- 1. सहायक आचार्य, हर्ष विद्या मन्दिर (पी.जी.) कॉलेज, रायसी, हरिद्वार, उत्तराखण्ड, मोबाइल: 9456381991
- 2. इतिहास विभाग, हर्ष विद्या मन्दिर (पी.जी.) कॉलेज, रायसी, हरिद्वार, उत्तराखण्ड, मोबाइल: 8439860813
Description
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आधुनिक शिक्षा परम्परा में भारतीय ज्ञान परम्परा के एकीकरण पर जोर देती है, जिससे समग्र
शिक्षा, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा मिले। यह पाठ्यक्रम में गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, योग,
धातुकर्म, वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में प्राचीन भारतीय योगदान को शामिल करने को प्रोत्साहित करती है, साथ ही वेद, उपनिषद,
रामायण और महाभारत जैसे शास्त्रों और भारतीय भाषाओं को महत्व देती है। एक बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाया गया है,
जिससे आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परम्परा साथ मिलकर कार्य कर सकें, और शोध केंद्रों एवं विश्वविद्यालयों को
स्वदेशी ज्ञान के दस्तावेजीकरण व अध्ययन के लिए प्रेरित किया गया है। संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं को विशेष महत्व
दिया गया है, जबकि शिक्षा में नैतिक मूल्यों को समाहित करने के लिए भगवद गीता और जातक कथाओं जैसे ग्रंथों से
प्रेरणा ली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पारंपरिक भारतीय शिल्प, कृषि और स्वदेशी कौशल को पुनर्जीवित कर
व्यावसायिक शिक्षा का समर्थन करती है, जिससे नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। इसके अतिरिक्त, नीति आयुर्वेद,
योग और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ बढ़ावा देने और उनके अनुसंधान को प्रोत्साहित
करने का भी प्रावधान करती है। भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्रों की स्थापना और भारतीय विद्या भवन जैसे संस्थानों को सशक्त
बनाने के माध्यम से, यह नीति भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत को संरक्षित और वैश्विक शिक्षा परिदृश्य में एकीकृत करने
का मार्ग प्रशस्त करती है, जो आत्मनिर्भर भारत और वसुधैव कुटुंबकं के दर्शन के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
Files
24--------- 148-153.pdf
Files
(196.3 kB)
| Name | Size | Download all |
|---|---|---|
|
md5:95de48f6cf53a099fb1d3710bb7f644b
|
196.3 kB | Preview Download |