वर्तमान भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन
Authors/Creators
- 1. डीन शिक्षा संकाय, मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की (हरिद्वार) उत्तराखंड
- 2. असिस्टेंट प्रोफेसर, मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की (हरिद्वार) उत्तराखंड
Description
भारतीय समाज अपनी प्राचीन परंपराओं और तेजी से विकसित हो रही आधुनिकता से बुना हुआ एक समृद्ध चित्रपट है। यह शोधपत्र समकालीन भारत में परंपरा और आधुनिकता के बीच गतिशील अंतर्संबंध की खोज करता है, जिसमें सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह जांचता है कि इन शक्तियों का सह-अस्तित्व राष्ट्र की पहचान और प्रगति को कैसे आकार देता है। शोधपत्र चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा करता है, सामंजस्यपूर्ण संश्लेषण के मार्गों पर प्रकाश डालता है। भारत, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध परंपराओं का देश है, जो एक ऐसे चौराहे पर है जहाँ प्राचीन प्रथाएँ सह-अस्तित्व में हैं और कभी-कभी आधुनिकता से टकराती हैं। यह शोध पत्र समकालीन भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता के बीच के नाजुक संतुलन की खोज करता है। यह जांचता है कि भारत अपने ऐतिहासिक लोकाचार को वैश्वीकरण, तकनीकी उन्नति और विकसित होते सामाजिक मानदंडों की माँगों के साथ कैसे एकीकृत करता है, इस गतिशील परस्पर क्रिया में निहित चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डालता है।
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References
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- कुमार, आर. (2020)। "भारतीय परंपराओं पर आधुनिकीकरण का प्रभाव।" जर्नल ऑफ इंडियन स्टडीज, 45(3), 112-129।