Published January 9, 2025
| Version https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=10071
Peer review
Open
वैश्वीकरण एवं भारत पर इसका प्रभाव
Description
वैश्वीकरण एक उभरती हुई सशक्त वैश्विक वास्तविकता है जो अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में गुंजायमान है। वैश्वीकरण शब्द व्यापार अवसरों की जीवंतता एवं उनके विस्तार का द्योेतक है। प्रस्तुत शोध पत्र के लेखन का उद्देश्य वैश्वीकरण का अर्थ स्पष्ट करते हुए भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का विश्लेषण करना है। शोध पत्र में वैश्वीकरण के विकास में योगदान देेने वाले कारकों की विवेचना की गई है। शोध पत्र में वैश्वीकरण की विशेषताओं का भी वर्णन किया गया है। वैश्वीकरण की प्रक्रिया से विकासशील देश किस प्रकार प्रभावित हुए है, इसका विश्लेषण भी शोध पत्र में किया गया है। भारत के लिए वैश्वीकरण कितना उपयोगी एवं चुनौतीपूर्ण है, इसकी व्याख्या भी शोध पत्र में की गई है।
Files
वैश्वीकरण एवं भारत पर इसका प्रभाव.pdf
Files
(396.7 kB)
| Name | Size | Download all |
|---|---|---|
|
md5:d4fde477f2333be47376fb8c760b81c7
|
396.7 kB | Preview Download |
Additional details
Dates
- Submitted
-
2024-12-27
- Accepted
-
2025-01-06
Software
References
- वर्ल्ड ट्रेड प्रेस, कैलिर्फोनिया, 2003 (चार्ल्स मिशेल, इन्टरनेशनल बिजनेस कल्चर), पृ.सं. 3 मिश्र एवं पुरी, भारतीय अर्थव्यवस्था, बम्बई, 2005 (सत्रहवां संस्करण), पृ.सं. 44 कोठारी, राकेश कुमार एवं जैन, पी.सी., अन्तर्राष्ट्रीय विपणन, जयपुर, पृ.सं. 21-22 भार्गव, नरेश, वैश्वीकरण समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य, रावत पब्लिकेशन्स, जयपुर, 2014, पृ.सं. 97 फड़िया, बी.एल. एवं फड़िया, कुलदीप, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध, साहित्य भवन पब्लिकेशन्स, आगरा, 2020, पृ.सं. 607 गढ़वाल, शिखा, वैश्वीकरण, मानवाधिकार और गाँधी, लिट्रेरी सर्किल, जयपुर, 2013, पृ.सं. 9 खंडेला, मान चन्द, वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था, आविष्कार पब्लिशर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, जयपुर, 2014, पृ.सं. 67 कृष्ण, संदीप साईं, वैश्वीकरण की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का विकल्प एकात्म मानववाद, राधा पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली, 1999, पृ.सं. 15 दत्त, गौरव एवं महाजन, अश्विनी, भारतीय अर्थव्यवस्था, एस.चन्द एण्ड कम्पनी प्रा.लि. नई दिल्ली, 2016, पृ.सं. 251 दवे, रमन कुमार, वैश्वीकरण एवं भारतीय अर्थव्यवस्था, आर.बी.एस.ए. पब्लिशर्स, जयपुर, 2005, पृ.सं. 15