॥ पर्यावरण की भारतीय अवधारणा ॥
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- 1. Vai. Dhunda Maharaj Degloorkar College, Degloor
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" छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे ।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षा : सत्पुरूषा इव ॥ (१)"
पर्यावरण का अर्थ सरल रूप से बताने जाये तो प्रकृती का आवरण स्वरूप कहना होगा ।
' परित: आवरणं पर्यावरणम् ।'
अर्थात प्राणी जगत को चारो और से ढकने वाला प्रकृती तत्त्व जिनका हम प्रत्यक्षतः एवं अप्रत्यक्षत : , जाने या अंजाने रूप मे उपभोग करते है । पर्यावरण मुख्य रूप से भौतिक , जैविक एवं सांस्कृतिक कहा गया है । क्षिती , जल , पावक , गगन और समीर ये पंचमहाभूत भौतिक एवं जैविक पर्यावरण की निर्मिती कराते है । तथा मानवकृत संस्कृती का निर्माण मानव मन , बुद्धी एवं अहं से होता है । इसलिये गीता मे भगवान श्रीकृष्णाने प्रकृती के पाच तत्व के स्थानो पर आठ तत्वों का उल्लेख किया हुआ दिखाई देता है ।
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