तुलसीदास कृत रामचरितमानस में पर्यावरण
Authors/Creators
- 1. हिंदी विभाग प्रमुख, वै. धुंडा महाराज महाविद्यालय,देगलुर
Contributors
Editor:
Description
श्री रामचरितमानस में पर्यावरण के संदर्भ मे महान संत गोस्वामी तुलसिदास ने पर्यावरण संरक्षण को स्थान दिया है । अपने पदो और चौपाइ के माध्यमसे नदी,पर्वत, पेढ, पशु पक्षी, प्राणी आदि के महत्व को बताया है । अगर पर्यावरण अच्छा है तो मनुष्य, पशु पक्षी सब खुशी से रहते है । इसलिए पर्यावरण का रक्षण हमे करना है । साथ में पर्यावरण को स्वच्छ भी रखना हमारी जिम्मेदारी भी है । हमारे जीवन को प्रभावीत करनेवाले सभी जैविक और अजैविक तत्वो, तथ्यो, प्रक्रियाओ और घटनाओ के समुच्चय से निर्मित इकाई है । यह हमारे चारो और व्याप्त है और हमारे जीवन की प्रत्येक घटना इसी के अंदर सम्पादित होती है । हम मनुष्य अपनी समस्त क्रियाओ से इस पर्यावरण को भी प्रभावित करते है । इस तरह प्रत्येक जीवधारी और पर्यावरण मे अटुट संबंध है । आज बडे बडे शहरो राष्टीय आंतरराष्टीय संगोष्ठीया होती है । प्राचीन काल मे भी आश्रम में संगोष्ठीया होती थी । आज भी और प्राचीन कालमे वैसाही विचार मंथन होता है ।
Files
x65.pdf
Files
(457.5 kB)
| Name | Size | Download all |
|---|---|---|
|
md5:ce29a309ff2ea2fbbeaf63d11f97a07a
|
457.5 kB | Preview Download |