Published July 31, 2024 | Version v2
Journal article Open

एक देश एक चुनाव की प्रासंगिकता

  • 1. असिस्टेंट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान विभाग एम.एम.कालेज बिहिया, संबंध वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा भोजपुर बिहार

Contributors

Description

भारत जैसे अनेकता में एकता वाला देश जो की सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश के ताज से सुशोभित है, जहां पर जीवंत लोकतंत्र का मूल्य विद्यमान है। उस जीवंत लोकतंत्र में चुनाव एक अनिवार्य प्रकिया हैं। स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला होती है। भारत जैसे देश में निर्बाध रूप से निष्पक्ष चुनाव कराना हमेशा से एक चुनौती रहा है। यदि हम अपने देश के चुनाव पर एक नजर डालें तो हम पाते हैं कि हमेशा ही देश में कहीं ना कहीं चुनाव होते रहता है। चुनाव के इस निरंतरता के कारण देश हमेशा चुनावी मोड में ही रहता है। इसके चलते प्रशासनिक उथल-पुथल के साथ विकास कार्यों को प्रभावित होना लाजमी है। देश में लगातार चुनाव के कारण देश में बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू करनी पड़ती है। इसकी वजह से सरकार आवश्यक नीतिगत निर्णय नहीं ले पाती और विभिन्न योजनाओं को लागू करने में समस्याएं आती है। इन समस्याओं से निजात पाने तथा सरकार की भारी बजट खर्च को बचाने के लिए एक देश एक चुनाव आवश्यक कदम होगा।  वैसे यह पद्धति नया नहीं है अपितु हमारे देश में 1952 से 1967 तक लोकसभा तथा विधानसभाओं का चुनाव साथ-साथ कराया गया था। अतः आगे करने में हमें दिक्कत नहीं होगी, थोड़े बहुत सुधारो के साथ संविधान में संशोधन की आवश्यकता पड़ेगी जिसको कर के हम अपने देश को बार-बार चुनाव कराने वाले खर्चों से बचा सकते हैं। पूरे कार्यकाल तक सरकारें अपने विकास कार्य को निर्बाध रूप से गतिमान बनाए रख सकते हैं। सरकारी तंत्रो तथा सरकारी कर्मचारियों को चुनावी मोड़ से बाहर निकाल सकते हैं। इसमें भाग लेने वाले अध्यापकों के चलते बाधित शिक्षा को सुचारू रूप से चालू रख सकते हैं। अतः एक देश एक चुनाव होना अत्यंत ही आवश्यक है।

Files

39.pdf

Files (784.5 kB)

Name Size Download all
md5:806cd7678a165f0e8d9fa81323f30810
784.5 kB Preview Download