Published June 30, 2024 | Version v1
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भारत में महिला श्रमिक कानूनों में डॉ. भीमराव आंबेडकर का योगदान

  • 1. पीएच. डी. (शिक्षाशास्त्र एवम् इतिहास), असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक पी.जी.कॉलेज, गंज मुरादाबाद, उन्नाव (उ. प्र.)

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अपने कठिन श्रम, त्याग, बलिदान एवं लगन के बल पर जिन महापुरुषों ने समय-समय पर इतिहास के लोगों का निर्माण किया है, उनमें बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का नाम सर्वोपर एवं सर्वश्रेष्ठ है।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने समाज सुधार का कार्य करते हुए श्रमिकों की समस्याओं की ओर अपना ध्यान आकर्षित किया। भारत में श्रमिकों एवं श्रमिक आंदोलन का अपना एक पृथक स्वरूप एवं एक अलग इतिहास रहा है। यूरोप या अन्य देशों में चल रहे श्रमिक आंदोलन का स्वरूप यहां से भिन्न है। उन देशों के श्रमिकों की एक ही समस्या है। वह है आर्थिक समस्या। परंतु भारतीय संघ का की दो प्रकार की समस्याएं हैं: एक आर्थिक क्षेत्र की दूसरी सामाजिक क्षेत्र की।

डॉ भीमराव अंबेडकर ने जीवन का एक बड़ा भाग श्रमिकों के बीच में बिताया था। अतः वे उनकी समस्याओं, आकांक्षाओं अपेक्षाओं और मजबूरी से अच्छी तरह अवगत थे। बचपन में वह मिलो में श्रमिकों का खाना देने भी जाते थे। वह श्रमिक आंदोलन से जुड़े हुए थे ही और उन्होंने कुछ हड़तालों का संचालन भी किया था। केंद्रीय परिषद की सदस्यता के दौरान जब वह एक बार धनबाद गए थे तो श्रमिकों के घरों में घुस- घुस कर उन्होंने उनके रहन- सहन की स्थिति का ज्ञान प्राप्त किया। यह उनकी श्रेणियां के प्रति नजदीकीपन का एक मापदंड है।

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