भारतीय कानून-व्यवस्था : पुलिस के सन्दर्भ में
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है | वह संसार में अकेला रहकर जीवन यापन नहीं कर सकता | वह परिवार में, समूहों में, समाज में तथा देश के किसी भी हिस्से में रहकर अपना जीवन यापन करता है | जन्म से ही मनुष्य सब ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की आवश्यकता महसूस करता रहा है | प्रत्येक समाज में शान्ति, कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने का कार्य अनादिकाल से ही महत्वपूर्ण रहा है । समाज में असुरक्षा के वातावरण में न तो कोई नागरिक अपना विकास कर सकता है और न ही कोई राष्ट्र उन्नति कर सकता । प्रत्येक समाज में नागरिकों का सर्वांगीण विकास भी तभी सम्भव है, जब सरकार शान्ति एवं कानून-व्यवस्था को बनाये रखने में सुदृढ़ एवं सक्षम हो । सरकार अपने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उद्देश्यों को समाज में शान्ति के वातावरण में ही प्राप्त कर सकती है । वर्तमान युग विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी का युग है | विज्ञान के क्षेत्र में नवीन आविष्कारों ने जहाँ समाज के रूप एवं व्यवस्था में अधिक परिवर्तन कर दिया, वहीं जनता की आकांक्षाओं में भी परिवर्तन हुआ है । लोककल्याणकारी राज्यों की अवधारणा से राज्यों की भूमिका में भारी वृद्धि हुई है | आधुनिककाल में समाज का कोई भी क्षेत्र राज्य की जकड़ से परे नहीं है । सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन में मुख्य भूमिका के कारण व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व राज्यों पर आन पड़ा है। शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य, भुखमरी, ग्रामीण-विकास, उद्योग, कृषि, गरीबी, बेरोजगारी आदि क्षेत्रों से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान हेतु सार्वजनिक नीतियों व कार्यक्रमों का निर्माण एवं क्रियान्वयन का समस्त कार्यभार लोक प्रशासन का प्रमुख दायित्व बन गया है | अत: इन सभी क्षेत्रों में कानून एवं व्यवस्था की आवश्यकता को महसूस किया जाता है |
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