Published January 15, 2024 | Version v1
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मिलेट्स आन्दोलन : मानवीय एवं पारिस्थितिकीय आवश्यकता

  • 1. बी०आर० डी०बी०डी० पीजी कॉलेज आश्रम बरहज उत्तर प्रदेश

Description

मोटा अनाज -(ज्वार, बाजरा, रागी, सांवा, कुटकी, चना, कोदो और कंगनी) को विश्व खाद्य तालिका में पुनः प्रतिस्थापित करने के लिए भारत की अग्रणी भूमिका उपभोक्ता, छोटे एवं सीमांत किसान, पारिस्थितिकी एवं जलवायु से संबंध, समग्र चुनौतियों के समाधान एवं हित धारकों की सुरक्षा के साथ सतत विकास लक्ष्य-2 (एसडीजी-2) को प्राप्त करने हेतु एक पर्यावरण, संवाहनीय टिकाऊ कृषि, पद्धति को व्यवहारिकता में लाने का जन आंदोलन है। जिसे “मिलेट्स आंदोलन के द्वारा सतत हरित विकास का लक्ष्य” कहा जा रहा है। वर्ष 2023 को “मोटा अनाज वर्ष” की घोषणा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत मोटा अनाज वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में वित्त वर्ष 2022-23 में भारत में 17.63 मिलियन हेक्टेयर भूमि में कृषि की गई। जबकि वर्ष 2021 में 16.93 मिलियन हेक्टेयर में मोटे अनाज की कृषि की गई। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत में 75.4 करोड डॉलर के मोटे अनाज का निर्यात किया है, जिसे 2025 तक 100 करोड डालर तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ मिलेट्स आंदोलन जारी है।

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