Published September 25, 2023 | Version Innovation The Research Concept
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वर्तमान भारत में शिक्षा का पुनरूत्थानः एक अध्ययन

Authors/Creators

  • 1. Government College Rohat, Pali, India

Description

This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Innovation The Research Concept"         

URL : https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=7433 

Publisher : Social Research Foundation, Kanpur (SRF International)          

Abstract :एक समय था जब दुनिया में,

विष्व गुरू हम कहलाते।

ज्ञान पिपासु भारत भू पर,

ज्ञानार्जन को आते।

समृद्ध था साहित्य हमारा,

विज्ञान कला में माहिर थे।

भारत की शिक्षा के चर्चे,

सारे जग में जाहिर थे।

जड़ से जुड़ी हुई शिक्षा थी,

संस्कार की पोषक थी।

उन बातों का था विरोध,

जो मानवता की शोषक थी।

लेकिन धीरे - धीरे हमने,

अपने आपको भूला दिया।

'मैकाले' की मीठी गोली ने,

हमें नींद में सुला दिया।

शिक्षा में पश्चिम के मानक को,

हमने स्वीकार किया।

अपनों से हम दूर गये,

और गैरों को ही प्यार दिया।

इस कारण शिक्षा का स्तर,

नीचे गिरता चला गया।

पश्चिमी सोचों के हाथों में,

देश हमारा छला गया।

आओ सोचें कैसे फिर से,

शिक्षा का 'उत्थान' करें।

जड़ से जुड़े हुए रहकर,

नित नूतनता का आह्वान करें।

विश्वगुरू भारत की 'शिक्षा' का परचम सम्पूर्ण विश्व में फहराता था। यहाँ की गुरूकुल शिक्षा प्रणाली ने दुनिया को कई विद्वान मनीषी, कलाकार, योद्धा साहित्यकार और वैज्ञानिक प्रदान किए है। कालान्तर में शिक्षा पर पश्चिमी प्रभाव और भारतीयता से भटकाव ने शिक्षा की गुणवत्ता को कम किया है।

आधुनिक भारत में शिक्षा के पुनरूत्थान हेतु इसके विभिन्न आयामों में भारतीयतानुरूप परिवर्तन अपेक्षित है। पाठ्यक्रम, अध्यापन शैक्षिक प्रबन्धन, प्रशासन और मूल्यांकन शिक्षा के इन सभी पक्षों में बदलाव आवश्यक है। पाठ्यक्रम में जहाँ भारतीय मूल्यपरक विषयवस्तुओं का समावेष किया जाना चाहिए वहीं अध्यापन प्रभावशाली बन सके ऐसे प्रयास जरूरी है। इस हेतु नवीनतम तकनीकों के उपयोग के साथ शिक्षण को केवल औपचारिक नहीं बनाकर प्रायोगिक तथा व्यावहारिक बनाया जाना आवश्यक है। शैक्षिक प्रशासन और प्रबन्धन शिक्षाविदों के हाथों में होने से भी आधुनिक भारत में शिक्षा को सुदृढ़ता प्रदान की जा सकती है। विद्यार्थियों का समग्र एवं सतत् मूल्यांकन, निष्पक्ष मूल्यांकन तथा विषयानुरूप मूल्यांकन भी शिक्षा को मजबुती प्रदान कर सकता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आधुनिक भारत की शिक्षा हमारी जड़ों से जुड़ी हुई हो और आधुनिकता का समावेष भी उसमें होना आवश्यक है।

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ISSN
2456-5474

Related works

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Journal article: 2456-5474 (ISSN)

Dates

Submitted
2023-09-11
Accepted
2023-09-19

References

  • 1. भारतीय संस्कृति पर पाश्वात्य प्रभाव, भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति, डॉ. कालूराम शर्मा, डॉ. प्रकाश व्यास, पंचशील प्रकाशन, जयपुर, पृ. 416-419 2. मेरे सपनो का भारत, गांधाीजी, नवजीवन प्रकाशन मंदिर अहमदाबाद, पृ. 203 3. बदलते परिवेष में राष्ट्रीय शिक्षा की परिकल्पना, बजरंग प्रसाद मजेजी, राजस्थान बोर्ड शिक्षण पत्रिका, अप्रेल 15 से सितम्बर 15 पृ. 45 4. आधुनिक भारतीय सामजिक एवं राजनीतिक चिन्तन, रिसर्च पब्लिकेशन इन सोशल साइन्सेज, जयपुर, 1974-75, पृ. 109 अवस्थी एवं अवस्थी 5. Vivekananda on India and Her Problems, P48 6. भारतीय राजनीतिक विचारक, डॉ, आनन्द प्रकाश अवस्थी, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, प्रकाशन आगरा, पृ. 203 7. गुरूदेव टैगोर का शिक्षा दर्शन, पी. डी. सिह,राजस्थान बोर्ड शिक्षण पत्रिका, अप्रेल 2007 से सितम्बर 2010 पृष्ठ - 43 8. । System of National Education ए महर्षि अरविन्द पृष्ठ 3 9. कैसी हो स्वतन्त्र भारत की शिक्षा व्यवस्था, साक्षात्कार, दीनानाथबत्रा, शैक्षिक मंथन (मासिक) 1 अगस्त 2011 पृ. 21 10. सर्वागिण विकास हो शिक्षा का लक्ष्य, सन्तोष पाण्डेय, शैक्षिक मंथन (मासिक) 1 नवम्बर 2016, पृष्ठ 05 11. बाबासाहब का शैक्षिक चिन्तन, प्रो. मधुर मोहन, रंगा, शैक्षिक मंथन (मासिक) 1 नवम्बर 2015, पृ 20 12. द हिन्दु 28 सितम्बर 2014