बद्रीनाथ आर्य क े वाॅश र ंग पद्धति मंे प ्रया ेगधार्मि ता
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- 1. शोधार्थी , महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट, सतना मध्यप ्रदेश
Description
भारतीय आधुनिक कला की प्रारंभ 19वीं सदी के मध्य से मानी जाती है। जब अंग्र ेजी शासक ने यूरा ेपियन कला में भारतीय
कलाकारा ें को प ्रशिक्षित करने के लिए मद्रास, कलकत्ता, मुंबई, लाहौर व लखनऊ में कला महाविद्यालय स्थापति करने का
निर्ण य लिया। इन कला महाविद्यालया ें ने स्वाभाविक अंग्र ेजी पद्धति से चित्रण करने वाले अ ंग्र ेजी कलाकारा ें की नियुक्ति ह ुई।
इसी दौरान जापान के कलाकार हिदिसा आ ैर र्ताइ कान कलकत्ता आए जिन्होंने वाॅश पद्धति का प्रषिक्षण भारत में सर्व प ्रथम
अविन्द्रनाथ ठाकुर का े दिया और इसी प्रकार भारत में वाॅश पद्धति का जन्म ह ुआ। जब भारतीय वाॅश पद्धति की बात आती है
ता े सबसे पहले बंगाल स्कूल का एक ऐसा वातावरण समाने आता है जिससे प ्रशिक्षित होकर कलाकार देश के सभी महत्वपूर्ण
कला केन्द्रा ें में स्थापित हुए और वाॅश चित्रण का एक वातावरण प ूरे देश में सृजित ह ुआ। ए ेसे में ब ंगाल स्कूल के बाद
लखनऊ वाॅश चित्रण के लिए दूसरे केन्द्र के रुप मे ं उभरा। यहां पर वाॅश का दूसरा विकसित रुप सामने आए जहा ं ब ंगाल म ें
अपारदर्शी या अल्पदर्शी रंगा ें का प ्रयोग ह ुआ वहीं लखनऊ में इससे बचा गया। वाॅश चित्रकला की तकनीक प्रारंभ मूलतः
अविन्दनाथ ठाकुर ने कलकत्ता में किया था। उनके कुछ विषय लखनऊ कला एवं शिल्प महाविद्यालय में नियुक्ति ह ुए इस
प ्रकार वह तकनीक लखनऊ में आ ैर विकसित ह ुई तथा बाद में इन सारे कलाकारों ने इस माध्यम में काम करते ह ुए इसका
विकास किया जिसमें आर्पित कुमार हालदार, अब्दूल रहमान चुगर्ताइ , एल0 एम0 सेन व बद्रीनाथ आर्य जैसे कलाकारों न े
जलरंग से वाॅश पद्धति में प ्रया ेग करते रह े।