समाज पर रंगा ें का प्रभाव
Description
स ंसार की प्रत्येक वस्तु की एक बनावट होती है जिसका एक रूप और रंग हा ेता ह ै, जो उनकी पहचान को महत्व प्रदान करता
ह ै, किसी भी वस्तु को उसक े रूप, आकार व रंग से पहचाना जा सकता है, यदि वस्तु में क ेवल आकार हा े तो वह नीरस दिखाई
देती ह ै। चित्र के समस्त तत्वों में सबसे अधिक संव ेगात्मक तत्व वर्ण हा ेता है। वर्ण एक प्रकार की लहर के समान हा ेता है, जा े
वस्तु का े जीवन प्रदान करता है।
रंग प्रकाष की किरणों का एक गुण ह ै जिसका अनुभव हम अपने नेत्रा ें क े माध्यम से करते ह ै ं। किसी वस्तु क े वास्तविक स्वरूप
का े हम रंगा ें क े द्वारा ही प्रदर्षित कर सकते ह ै ं। जिससे कि देखने वाले व्यक्ति पर उसका प्रभाव पड़े ।रंग वस्तु को ही नहीं
बल्कि भावनाओं का े समझने का भी एक साधन ह ै। यषा ेधर पण्डित द्वारा रचित जयमंगलम् क े अन्तर्गत चित्र षडंग में रंग का
प्रमुख स्थान है क्यांेकि वर्ण ज्ञान क े आभाव में चित्र षडंग की पाँच साधनायें व्यर्थ ह ैं।
रूपभेदाः प्रमाणानि भावलावण्योजनम्।
सदृष्य ं वर्णिका भंगः इति चित्र षडंगकम्।।