Published September 12, 2017 | Version v1

र ंग दृष्टि दा ेष: र ंग अ ंधता

  • 1. सहायक प ्राध्यापक, मनोविज्ञान, शास.स्ना.महाविद्यालय, नरसिंहप ुर (म.प ्र.)

Description

्रस्तावना:- मानव में र्कइ  प्रकार की संव ेदनाएं होती हैं जैसे दृष्टि, श्रवण, स्पर्श , गंध, स्वाद आदि। इनकी उत्पत्ति
उद्दीपका ें से होती ह ै, जिसे व्यक्ति अपने बाह ्य पर्यावरण से ग्रहण करता ह ै, यह उद्दीपक ज्ञानेन्द्रिया ें अर्था त आंख, कान,
त्वचा, नाक आ ैर जिव्हा को उद्दीप्त करते ह ैं, आ ैर विभिन्न संव ेदना को उत्पन्न करते ह ै ं। आइजनेक (1972) क े अनुसार ‘‘
संव ेदना एक मानसिक प ्रक्रम ह ै जा े आगे विभाजन या ेग्य नहीं होता। यह ज्ञानेन्द्रिया ें को प ्रभावित करने वाली बाह ्य उत्तेजना
द्वारा उत्पादित हा ेता ह ै, तथा इसकी तीव ्रता उत्तेजना पर निर्भ र करती ह ै, आ ैर इसके गुण ज्ञानेन्द्रिय की प ्रकृति पर निर्भर करते
ह ैं। इन पा ंच संवेदनाआ ें क े अतिरिक्त अन्य स ंव ेदना भी ह ै जैसे आ ंगिक संव ेदना, स्थ ैतिक संव ेदना तथा गति संव ेदना।
इन संव ेदनाओं में कुछ विशेषताए ं होती हैं जैसे प्रकार, तीव्रता, अवधि एव ं स्पष्टता। नेत्र शरीर का एक प्रमुख अंग ह ै तथा दृष्टि
संव ेदना सर्वाधिक विकसित, जटिल एव ं महत्वपूर्ण  ह ैं, नेत्रा ें क े माध्यम से प ्रकाश, चमक, आकार, गति एवं रंग की स ंव ेदना हा ेती
ह ै। प्रकाश की अनुपस्थिति में व्यक्ति देख नहीं सकता। रंग का प ्रत्यक्षण रोशनी की तरंग तैध्र्य पर निर्भर करता है। तरंग दैध्र्य
का माप नैनोमीटर से किया जाता ह ै, जो एक मीटर का एक अरब भाग होता ह ै, सबसे छोटा तरंग दैध्र्य 400 नैना ेमीटर का
होता ह ै। इससे ब ैंगनी रंग का प्रत्यक्षण होता ह ै। सबसे बड़ा तरंग दैध्र्य 700 से 800 नैनोमीटर का होता ह ै। इससे व्यक्ति को
लाल रंग का प ्रत्यक्षण हा ेता ह ै, आ ैर इन दोना ें सीमाओं क े मध्य क े तरंग दैध्र्य द्वारा अन्य सभी रंगा ें का प ्रत्यक्षण होता ह ै। चमक
का अर्थ  है रंग कितना गहरा या हल्का ह ै, अर्था त् रंगा ें की तीव ्रता का पता चलता है। रंग दो प ्रकार क े होते ह ै ं, प ्राथमिक एवं
गा ैण रंग। प ्राथमिक रंग लाल, हरा, नीला, पीला तथा बाकी के रंग गा ैण रंग क े अ ंतर्गत आते ह ै ं। न्यूटन (1966) ने पि ्रज्म की
सहायता से देखा कि सूर्य क े प ्रकाश में इ ंद्रधनुष क े सभी सातों रंग होते ह ै ं, अर्थात निष्कर्ष  निकाला कि सूर्य का प ्रकाश विभिन्न
रंगा ें से मिल कर बना हा ेता ह ै। रंग संव ेदनाओं से संबंधित तीन महत्वपूर्ण  घटनाए ं (च्ीमतवउमदवद) पर मनोवैज्ञानिक का
ध्यान गया रंग मिश्रण, रंग अनुकूलन तथा रंग अंधता। अधिका ंश रंग अन्य दूसरे प ्रकार क े रंगा ें का मिश्रण होता है ं जैसे नारंगी
रंग लाल आ ैर पीले रंग क े मिश्रण के उपरांत प ्राप्त होता ह ै। अन्य सभी रंग प ्राथमिक रंगा ें क े मिश्रण के पश्चात् बनते ह ैं।
भिन्न-भिन्न प्रकाश की मात्रा के साथ आंख को अनुकूलन करना होता ह ै जैसे अ ंध ेरे में कुछ समय तक दिखर्लाइ  न देना आ ैर
कुछ समय के बाद थोड़ा-थोड़ा दिखलाई देना इसे अंधकार अनुकूलन कहा गया ह ै इसके ठीक विपरीत प ्रकाश अनुकूलन होता
ह ै। रंग अंधता, विभिन्न रंगा ें क े मध्य विभेद करने की अक्षमता होती ह ै। सामान्य व्यक्ति सभी रंगा ें की पहचान करने में समर्थ
होता ह ै लेकिन कुछ लोग ए ेसे होते ह ै ं जिन्ह ें सभी रंगा ें की संव ेदना तो हा ेती ह ै, लेकिन विभिन्न रंगा ें का े एक दूसर े से अलग
करने में कठिर्नाइ  होती ह ै। इसे ‘‘रंग दुर्ब लता’’ कहते ह ै ं। कुछ लोग ए ेसे हा ेते ह ै ं जिन्ह ें रंग दिर्खाइ  नही ं देते ए ेसे ला ेगा ें को रंग
अ ंध (ब्वसवनत इसपदक) कहा जाता ह ै आ ैर इस रंग दृष्टि दोष या विकार का े ‘‘रंग अ ंधता’’ कहा जाता ह ै।
 

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