"भारत में ग्राफिक्स कला में र ंगा ें का उपया ेग"
Authors/Creators
- 1. ग्राफिक्स विभाग, इ ंदिरा कला संगीत विश्व विद्यालय, खैरागढ़, (छत्तीसगढ़)
Description
उद्द ेश्यः
ऽ छापाचित्रण की उत्पत्ति एवं विकास
ऽ छापाचित्रण का भारत में इतिहास एवं विकास
ऽ भारत में रंगीन छापाचित्रण की श ुरुआत
ऽ छापाचित्रण में रंगा ें का समाज पर प्रभाव
ऽ छापाचित्रों की ललित कला में मान्यता
यह एक विदेशी कला ह ै जा े यूरा ेप आदि से भारत र्में आइ . “ मशीनी छपाई का परिचय भारत में 16वी ं शताब्दी के
मध्य ह ुआ। ‘‘ ;1द्ध
छापा चित्रकला का इतिहास:
छापाकला की उत्पत्ति मोहन जोदड़ा ें स े प्राप्त मोहरा ें स े मानी जा सकती ह ै। मोहन जोदड़ा े की सभ्यता में एवं आदि सभ्यताओं
में रेशमी आ ैर सूती वस्त्रा ें क े प्रया ेग एवं उन पर छापा ें क े प्रमाण भी मिले है ं अतः लकड़ी क े ठप्पों क े छापों को छापाकला का
प ्रारम्भिक रूप मान सकते है ं।
भारत में र ंगीन छापा चित्रण:
भारत में अत्यधिक मात्रा में छापाचित्रों का निर्मा ण किया गया आ ैर अनेकों कलाकारा ें जिनमें विलियम आ ैर डेनियल ने छापा
कला की भारत में संभावनाओं का े टटा ेला आ ैर दा ेना ें कलाकारों ने 1786-88 के मध्य ‘ कलकत्ता क े बारह दृश्य’ नामक मूल
अम्लांकन रंगीन छापाचित्रों का निर्मा ण किया जिनमें चित्रा ें का े एक रंग में छापा गया और उनको रंगीन स्याही से रंगदार बनाया
गया। ;9द्ध छापाकला की इस गतिविधि क े बाद देश में अनेका ें जगह रंगीन छापाचित्रों का निर्माण किया जाने लगा जिनमें
कलकत्ता केंद्र था । इस प्रकार रंगीन विज्ञापन छापाचित्रा ें का भी निर्मा ण भी श ुरू हो गया ।