Published September 11, 2017 | Version v1

र ंगा े की बढती कीमता ें का तैलचित्र व्यवसाय पर प्रभाव - एक अध्ययन

  • 1. सहा. प्राध्या. (अर्थ शास्त्र) शा. म. ल. बा. क. महा. इन्दौर

Description

संसार के समस्त प ्राणिया ें मे केवल मानव एक ए ेसा प्राणी है जा े सोन्दर्य की अनुभूति करता है। मानव सभ्यता मे कला की
उत्पत्ति मानव मन मे सा ेन्दर्य क े प ्रति जिज्ञासा क े कारण हुई ह ै। इसके माध्यम स े मनुष्य अपने भाव, मन की अनुभूति व्यक्त
करके आन्नद महसूस करता ह ै अर्था त उसकी सृतनात्म प ्रव ृति की अभिव्यक्तिी कला के माध्यम से करता ह ै। इसमें चित्र,मूर्ति
अभिनय,गायन,वादन एव ं हात्तका ेथत शामिल है। इसका उद्देश न क ेवल सृजन करना है बल्कि यह संस्कृति की परम्परा को
बनाये रखने मे भी सहायक हा ेता ह ै, जो जनकल्याण क े लिए उपया ेगी ह ै। कला का े सामान्यतः दो वर्गो मे बाटाॅं जाता ह ै-
ललितकला एवं व्यवसायिक कला ललितकला का मुख्य उद्देश्य स्वतः सूखाय हा ेता ह ै जो मन का े आन्नद देता ह ै दुसरी और
व्यवसायिक कला एक ऐसा कार्य ह ै जिससे किसी की जिविका का निर्वा ह हा ेता समाज की आवश्यकताको की प ूर्ति करने मे
व्यवसायिक कला का निरन्तर या ेगदान रहा ह ै। एक उत्पादक इसी बात को ध्यान मे रखकर अपना उत्पादन करता ह ै। आ ैर
उस उत्पादन को सर्व . उपयोगी एवं लाभप ्रद बनाने के लिए समय क े अनुसार उसमे रगा े के माध्यम से परिवर्तन करता है।
इन्टिरियर डिजाइनिंग और चित्रकारिता आज एक प ्रमुख लाभप्रद व्यवसाय का रूप ले चुकी है। आन्तरिक सज्जा मे तैलचित्रा े
का अधिक प ्रयोग कर इसकी ख्याति का े जन जन तक पह ुचॅंा दिया ह ै। प ्राचीनकाल मे राजा-महाराज एवं धनी व्यक्ति अपनी
गृहसज्जा मे तैलचित्रा े का प ्रयोग बढे प ैमाने पर करते थ े। आमजनता कच्ची दीवारा ें पर जमीन पर कच्चे रंगा े स े चित्रकारी करते
थे लेकिन आजकल इन्टिरियर डिजाइनों मे अच्छे किस्म के रंगा े का प्रयोग गृहसज्जा मे करके इस व्यवसाय मे नये आयाम
खोल दिए है जो व्यक्तिया ें की आय व रोजगार का साधन बन रहा ह ै। इस व्यवसाय मे भावों को ध्यान मे रखकर रंगा े क े
प ्रयोग स े वस्तुओं की सुन्दरता आ ैर विविधता को बढा देते ह ै।

Files

46_IJRG14_CC11_10.pdf

Files (365.2 kB)

Name Size
md5:b44b8825cc63e0a3fdb585ad825a02b6
365.2 kB Preview Download