Published September 7, 2017 | Version v1

वर्तमान समयानुसार संगीत पाठ्यक्रमा ें म ें बदलाव की आवश्यकता

  • 1. सहायक प्राध्यापक संगीत शासकीय कमलाराजा कन्या स्नातका ेत्तर महाविद्यालय ग्वालियर म.प ्र

Description

भारतीय कलाओं में नवीन प्रया ेग एव ं संभावनाए ँ
भारतीय कलाओं में संगीत कला का विशेष महत्व ह ै। संगीत कला अन्य कलाआ ें की तरह मानसिक बोध कराने की अनुक ृति
नहीं करती, बल्कि वह स्वयं की इच्छा की अनुकृति है आ ैर यह बोध कराने की क्रिया इसी की छाया ह ै। संगीत के सशक्त
प्रभाव का यही कारण है कि वह स्वयं असली तत्व की अभिव्यक्ति करता है। संगीत कला किसी विश ेष सीमित आनन्द, दुःख,
पीड़ा, भय, शांति या प्रसन्नता क े व्यक्त नहीं करती बल्कि वह इनके सामान्य आ ैर सार्वभौमिक स्वरूप का े अभिव्यक्ति देती है।
संगीत हमारी आत्मा में भक्तिमय अनुभूतिया ं भर देता ह ै।
संगीत द्वारा छात्र का बौद्धिक, भावात्मक आ ैर आध्यात्मिक विकास किया जा सकता ह ै अतः इनक े लिये वर्तमान पाठ्यक्रम में
सुधार ह ेतु पूर्ण  चिंतन किया जाना चाहिए। वर्तमान में स्नातक स्तर तक जा े पाठ्यक्रम प ्रचलित ह ै वह उन विद्यार्थि यों क े लिये
कठिन होता ह ै जो सीधे स्नातक स्तर में संगीत विषय लेते ह ै ं आ ैर जिन्हें प ूर्व में संगीत का कोई ज्ञान नहीं होता ह ै क्या ेंकि
अधिकतर स्थाना ें पर विद्यालया ें में संगीत विषय ब ंद कर दिया गया ह ै। अतः स्नातक स्तर पर उन प ्रारंभिक एवं प ्रचलित रागों
की भी जानकारी दी जानी चाहिए जा े वर्तमान में नही ं दी जा रही है। कुछ विद्यार्थी प्रतिभावान हा ेते ह ैं उन्ह े पा ्ठ्यक्रम के
अतिरिक्त भी सिखाया जाना चाहिए। जैसे खण्डमेरू पद्धति से स्वर प ्रस्तार ज्ञान करना, मूच्र्छना का प ्रयोग आदि जानकारी
एम.ए. के साथ-साथ स्नातक स्तर पर भी दी जानी चाहिए जिसस े प ्रतिभावान विद्यार्थी दस थाटों में अलंकारों क े अतिरिक्त
स्वर प ्रस्तार की भी साधना कर सक े।
पाठ्यक्रम के साथ-साथ प्रश्न पत्रा ें क े बनाने में परिवर्तन किया जाना चाहिए। यूनिट पद्धति के कारण विद्यार्थी  प ूर्ण  पाठ्यक्रम
में से कुछ चीजे याद ही नहीं करते ह ै। अतः उनका ज्ञान अधूरा रहता ह ै। जैसे परीक्षा में स्वरलिपि वाले प ्रश्न में बहुत
विकल्प रहते ह ैं किसी ध ्रुपद अथवा धमार अथवा छोटे ख्याल की स्वरलिपि लिखने का े आती ह ै अतः विद्यार्थी किसी एक
ब ंदिश की स्वरलिपि कण्ठस्थ करते ह ै ं जबकि छा ेटे ख्याल की स्वरलिपि लिखने क े लिये एक राग का नाम दिया जाना चाहिये
जिससे विद्यार्थी  सभी छोटे ख्याल की स्वरलिपि कण्ठस्थ करेंगे। इसी प ्रकार रागवर्णन एवं ताल वाले प ्रश्नों में राग ए ंव ताल
का नाम दिया जाना चाहिये।

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