Published September 6, 2017 | Version v1

महान संगीतज्ञ तानस ेन

  • 1. सहा. प ्राध्यापक इतिहास , म.ल.ब. शा. स्ना. कन्या महा. किला भवन, इन्दौर

Description

तानस ेन एक महान संगीतज्ञ थे। अब ुल फजल बादशाह अकबर क े उदार संरक्षण में विभिन्न संगीतज्ञा ें क े हा ेने का वर्ण न करता
ह ै, उनमें वह पहला स्थान संगीत सम्राट तानस ेन का े प ्रदान करता ह ै।। तानसेन उस युग क े सर्व श्र ेष्ठ प ्रतिभावान संगीतज्ञ थ े।
तानस ेन की प्रशंसा करते ह ुए अब ुल फजल ने लिखा ह ै ’’ भारत में उसक े समान गायक एक सहस्त्र वर्षो से नहीं ह ुआ’’
तानस ेन का जन्म 1531-32 में ग्वालियर से लगभग 43 किला ेमीटर दूर ब ेहट ग्राम में एक गा ैड़ ब ्राम्हण परिवार में ह ुआ था।
इनका प ्रारंभिक नाम त्रिलोचन पांडे था, बाल्यकाल से ही उन्ह ें संगीत में विशेष अभिरूचि थी। ग्वालियर के नरेश मानसिंह
तोमर ने ग्वालियर में एक संगीत शाला स्थापित की थी जो मुगला ें द्वारा ग्वालियर पर अधिकार कर लेने क े बाद भी कई वर्षो
तक विद्यमान रही। तानसेन ने इसी संगीत शाला में संगीत की प्रारंभिक षिक्षा प ्राप्त की थी। इन्होंने अपने ताउ बाबा रामदास
क े गुरू वृन्दावन के तत्कालिन प ्रसिद्ध संत गायक बाबा हरिदास से संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी इसके अतिरिक्त उन्होंन े
मोहम्मद गौस स े भी गायन विद्या सीखी तर्था इ रानी संगीत का भी ज्ञान प ्राप्त किया।
प ्रारंभ में तानस ेन ने ग्वालियर क े राजा रामनिरंजनसिंह के दरबारी संगीतज्ञ के रूप में ख्याति प ्राप्त की। इस समय रीवा के
राजा रामचन्द्र बघेल कला आ ैर साहित्य के प ्रेमी व उदार आश्रयदाता थे। तानस ेन राजा रामचन्द्र बघेल क े आमंत्रण पर रीवा
दरबार में जाना स्वीकार कर लिया। यहा तानसेन यश, गा ैरव, प ्रसिद्धि मिली। रामचन्द्र ने तानस ेन को धन, सम्मान और पद
बड़ी उदारतापूर्वक प ्रदान किये थ े और तानसेन उनका बड़ा कृपापात्र बन गया। वह तानसेन की संगीतकला से इतना अधिक
प ्रभावित आ ैर प ्रसन्न हुए थे कि रामचन्द्र ने एक बार तानसेन को एक करोड़ चांदी की मुद्राओं से पुरूस्कृत किया था, संभवतः
यही उसे तानसेन की उपाधि मिली ओर इसी के नाम से प ्रसिद्ध हो गया।
 

Files

56_IJRG15_IM01_51.pdf

Files (317.6 kB)

Name Size
md5:6cd8ddf86e180ad73e510c637e2dca50
317.6 kB Preview Download