Published September 5, 2017 | Version v1

स ंगीत आ ैर समाज

  • 1. प्राध्यापक तथा विभागाध्यक्ष राजनीति शास्त्र शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई स्नातका ेत्तर कन्या महाविद्यालय, इंदा ैर

Description

जीवन में कला का महत्वप ूर्ण  स्थान ह ै। मानव की अनुकरण व ृत्ति आ ैर सा ैंदर्य-प्रियता का े कला की जननी माना जाता है।
कला का सृजन करना तथा उसका उपभा ेग करना, यह मनुष्य जाति की अपनी विशिष्ट शक्ति है। अपनी इसी विशिष्टठ शक्ति
क े कारण वह अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ कहलाता ह ै। कला आत्मा का े समृद्ध बनाती ह ै अतः कहा जाता ह ै कि आत्म तृप्ति की
क्षुधा से ही कलाओं की उत्पत्ति होती ह ै।
कलाओं क े मुख्य दो प्रकार बताए गए ह ैं . 1. ललित कलाएं आ ैर 2. ललित ेर कलाए ं। जा े कलाए ं मुख्यतः मानव की भौतिक
आवश्यकताओं को प ूर्ण  करती हैं, उन्ह ें ललितेर कलाए ं कहते ह ैं। जैसे शिल्प कार्य बर्ढ़इ  का कार्य, ब ुनाई का कार्य आदि। इन
कलाओं का मुख्य उद्देश्य उपया ेगिता होता है अतः इन्हें प्रयुक्त कलाएं भी कहते ह ैं। कला का आनंद प्राप्त करने क े उद्देश्य से
जिन कलाओं का सृजन होता ह ै, उन्ह ें ललित कलाए ं कहते ह ैं। यह आनंद श ुद्ध तथा इंद्रियातीत होता ह ै। साहित्य, चित्रकला
आ ैर संगीत ललित कलाओं क े अ ंतर्गत आते ह ैं। ललित कलाएं मानव की नैतिक प्रगति की सूचक हा ेती हैं जबकि ललितेर
कलाएं उसकी बौद्धिक प्रगति, कार्यकुशलता आ ैर भौतिक प्रगति का प्रमाण देतीं ह ैं। कला, फिर चाहे वह ललित कला हो
अथवा ललितेर कला, सुसंस्कृत मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण  अ ंग ह ै।
मुख्य 64 कलाआ ें में संगीत कला अपना प्रमुख स्थान रखती है। स्वर और लय क े माध्यम से संगीत मानव के ऊर्मी  तंत्र का े
स्पर्श  करता ह ै। कला प्रेमी हा ेने क े साथ-साथ मनुष्य एक सामाजिक प्राणी भी है। प्राचीन यूनानी दार्श निक तथा राजनीति
शास्त्र के प्रथम राजनीति वैज्ञानिक अरस्तू का मत ह ै, श्मनुष्य अपने स्वभाव से एक राजनीतिक (सामाजिक) प्राणी ह ै। ऐसे
व्यक्ति को, जो समाज में नहीं रह पाता ह ै अथवा जिसे समाज में रहने की आवश्यकता अनुभव नहीं हा ेती है क्योंकि वह स्वयं
पर्या प्त ह ै, वह या तो पश ु होता ह ै या फिर देवता।1

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