Published September 1, 2017 | Version v1

''किशनगढ़ श्©ली का पर्यावरण-प्रकृति चित्र्ाण की सांस्कृतिक परम्परा''

  • 1. महारानी लक्ष्मीबाई, शास. स्नात. महा. इन्द©र

Description

‘‘राजस्थान की किशनगढ ़ श्©ली के चित्र्ा प्रकृति क¨ संरक्षित करके पर्यावरण जागरुकता क¨ आज के परिव ेश
में प्रदर्शित करत े हैं। चित्र्ा¨ ं में वनस्पति, जल, वायु तीन¨ं पर्यावरणीय घटक प्रचुर मात्र्ाा में चित्र्ाित ह ैं। पर्यावरण
में प्रकृति चित्र्ाण के साथ अध्यात्म दर्शन की सांस्कृतिक परम्परा क¨ ज¨ड ़ा गया ह ै। हरियालीमय सुरम्य
वातावरण चित्र्ा¨ं मंे प्रकृति चित्र्ाण की सांस्कृतिक थाती पर्यावरण प्रद ूषित ह¨न े से बचान े का सन्द ेश जन-जन
तक पहुँचाती प्रतीत ह¨ती है, ज¨ एक सकारात्मक प्रयास है।
पर्यावरण का तात्पर्य  समस्त ब्रह्माण्ड के न ैतिक एव ं जैविक व्यवस्था से ह ै, जिसके अंतर्गत समस्त जीवधारी
ह¨त े ह ैं। पर्यावरण में जीवधारी रहत े हैं, बढ ़त े हैं अ©र पनपत े हैं; अपनी स्वाभाविक प्रवृत्तिय¨ं क¨ विकसित करत े
हैं। मन ुष्य पर्यावरण का ही एक भाग ह ै, उससे पृथक उसका क¨ई भी अस्तित्व नहीं है। वायु, जल, भ ूमि,
वनस्पति, पेड ़-प©ध्¨, पशु, मानव सब मिलाकर पर्यावरण बनात े हैं। ‘‘प्रकृति मंे हमें ज¨ कुछ दिखाई द ेता ह ै-
वायु, जल, मिट्टी, वनस्पति तथा प्राणी सभी सम्मिलित रूप से पर्यावरण की रचना करत े है ं। अतः पारिस्थितिकी
पर्यावरण अध्ययन का एक विज्ञान है।1आधुनिक काल में जब से हमन े आध्यात्मिक मान्यताअ¨ं का त्याग किया
है तथा विज्ञान अ©र प्र©द्य¨गिकी क¨ ही मानव प्रगति का कारण मान लिया अ©र प्राकृतिक संसाधन¨ं का भरप ूर
द¨हन करना प्रार ंभ किया तभी हमारा पर्यावरण जीवन के लिए संकट प ूर्ण ह¨ गया है।2 विकास स े विनाश
का यह मंजर केवल प्रकृति के अत्यधिक द¨हन के कारण हुआ ह ै।

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