Published December 23, 2016
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KUMAR VIKAL KA KAVY SANSAR : PRGATIWADI CHETNA KA UTSA
Description
साठोत्तरी पीढ़ी के रचनाकार 'कुमार विकल' हिन्दी में 'अकविता' आंदोलन के प्रमुख कवि है। विकल' का काव्य 'जनवादी काव्य' होने के नाते जमीनी खुशबू से ओत-प्रोत है। आसमान की हवाई उड़ान उन्हें स्वीकार नहीं है। तमाम सुख सुविधाओं व अधिकारों से वंचित आदमी उनकी कविता के केंद्र में है। 'विकल' उन सब व्यवस्थाओं का विरोधी है, जो आदमी को कमजोर बनाती है, चाहे वह धर्म, राजनीति, परंपरा, जाति-पाति, मान्यताएं, अंधविश्वास, पूँजीवाद कुछ भी हो।