सत्ता, साहित्य और दिल्ली
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कहा जाता है, जो स्वभाव से अच्छे है, वह अच्छे ही रहेंगे, चाहे कुछ भी पढ़ें । जो स्वभाव के बुरे हैं, वह बुरे ही रहेंगे, चाहे कुछ भी पढ़े | इस कथन मेसत्य की मात्रा बहुत कम है | इसे सत्य मान लेना मानव चरित्र को बदल लेना होगा। जो सुन्दर है, उसकी ओर मनुष्य का स्वाभाविक आकर्षण होता है।हम कितने ही पतित हो जायॅ पर असुन्दर की ओर हमारा आकर्षण नहीं हो सकता । हम कर्म चाहे कितने बुरे करे पर यह असम्भव है कि करुणा औरदया और प्रेम और भक्ति का हमारे दिलो पर असर न हो । नादिरशाह से ज्यादा निर्दयी मनुष्य औरकौन हो सकता है - हमारा आशय दिल्ली मेकत्लेआम करानेवाले नादिरशाह से है। अगर दिल्ली का कत्लेआम सत्य घटना है, तो नादिरशाह के निर्दय होने में कोई सन्देह नही रहता। उस समयआपको मालूम है, किस बात से प्रभावित होकर उसने कत्लेआम को बन्द करने का हुक्म दिया था दिल्ली के बादशाह का वजीर एक रसिक मनुष्य था। जब उसने देखा कि नादिरशाह का क्रोध किसी तरह नही शान्त होता और दिल्लीवालो के खून की नदी बहती चली जाती है, यहाँ तक कि खुदनादिरशाह के मुँहलगे अफसर भी उसके सामने आने का साहस नहीं करते, तो वह हथेलियो पर जान रखकर नादिर
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