Published March 28, 2023 | Version v1

भारतीय दर्शन में कर्मवाद

  • 1. साहित्य संस्थान, ज.रा.ना.राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर (राज.),
  • 2. छात्र, साहित्य संस्थान, ज.रा.ना.राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर, राजस्थान

Description

कर्मवाद की प्रासंगिकता आधुनिक समय में भी ज्वलंत विषय है। हर व्यक्ति स्वार्थवश नैतिक-अनैतिक कर्म करता है फिर
उसे तर्क द्वारा अपने हिसाब से सही परिभाषित करता है। भारतीय दर्शन में कर्म व कर्मफल पर विस्तृत विमर्श है, जो संसार
को राह दिखाता है और जगत की उत्पत्ति एवं स्थिति, लय को व्यवस्थित रीति से संचालन के लिए तथा सुव्यवस्थित रूप
से चलने के लिए-कर्म का सिद्धांत है।

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