स्कूली छात्रों पर सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव
Description
सोशल मीडिया जनसंपर्क का एक महत्वपूर्ण साधन है, ये आज की भागदौड़ की जिंदगी का एक अहम् हिस्सा बनता जा
रहा हैं जिसे न तो छात्रों के जीवन से ही और न अन्य लोगों के जीवन से हटाया जा सकता है। सोशल मीडिया से हम
पलक झपकते ही किसी भी विषय से सम्बन्धित जानकारी हासिल कर लेते हैं लेकिन दोनों के ही अपने सकारात्मक व
नकारात्मक प्रभाव हैं, जो जीवन को बना भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते है सोशल मीडिया एक-दूसरे से हजारों
किलोमीटर दूर बैठे लोगों को ईमेल व फेसबुक के जरिये एक-दूसरे के सम्पर्क में ला सकता है, जिससे हजारों किलोमीटर
दूर बैठे व्यक्ति से भी हमारा सम्पर्क बना रहता है। फेसबुक, टिव्टर, गूगल, विकीपीडिया, टेलीविजन व मोबाइल के अपने
बहुत सारे सकारात्मक प्रभाव है। इंटरनेट के जरिये छात्र अपने एसाइनमेंट और प्रोजेक्ट से संबंधित जानकारी आसानी से
हासिल कर लेते हैं जोकि आज के परिवेश में बहुत ही महत्वपूर्ण है। आज सोशल मीडिया ने छात्रों को अपने इतने प्रभाव
में ले लिया है कि उनके पास अपने अध्ययन करने के लिए और बाहर जाकर खेलकूद व अन्य गतिविधियों में शामिल होने
का समय ही नहीं रहता है। फेसबुक, टिव्टर, गूगल, विकीपीडिया, ने छात्रों को अपने तक ही सीमित बना दिया है, वे
अपने कमरे में ही बैठे घंटो तक अपने दोस्तों के साथ चेटिंग करते रहते हैं, जिसके चलते छात्रों का सामाजिक दायरा
सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित बनकर रह गया है, इंटरनेट पर वे सिर्फ चेंटिंग तक ही सीमित नहीं है फेसबुक,
टिव्टर, गूगल, विकीपीडिया, पर छात्र अश्लील तस्वीरें, अश्लील वीडियो, आॅनलाइन जुआ खेलना इत्यादि गतिविधियों में
संलग्न है। चैटिंग को लेकर तो छात्र-छात्राओं में इतना अधिक उत्साह है कि वे चेटिंग के माध्यम से ही अपरिचित व्यक्ति
पर इतना अधिक विश्वास कर लेते हैं कि उसके लिए अपने परिवार को छोड़ने में भी नहीं हिचकते हैं, जिसके परिणाम
बहुत खतरनाक साबित हो रहे हैं। बल्कि हमारे स्कूली बच्चे भी उपरोक्त प्रभावों से वंचित नहीं है। “सामाजिक मीडिया
पारस्परिक संबंध के लिए अंतर्जाल या अन्य माध्यमों द्वारा निर्मित आभासी समूहों को संदर्भित करता है। यह व्यक्तियों और
समुदायों के साझा, सहभागी बनाने का माध्यम है। इसका उपयोग सामाजिक संबंध के अलावा उपयोगकर्ता सामग्री के
संशोधन के लिए उच्च इंटरैक्टिव प्लेटफार्म बनाने के लिए मोबाइल और वेब आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के रूप में
भी देखा जा सकता है”। सामाजिक मीडिया अन्य पारंपरिक तथा सामाजिक तरीकों से कई प्रकार से एकदम अलग है।