चीन की मोतियों की माला और हिंद महासागर की सुरक्षा चुनौतियां (भारत के विशेष संदर्भ में)
Authors/Creators
- 1. परास्नातक विभाग राजनीति विज्ञान वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय ,आरा, बिहार
- 2. एसोसिएट प्रोफेसर राजनीति विज्ञान विभाग। जवाहरलाल नेहरू कालेज डेहरी ओन-सोन बिहार।
Description
मोतियों की माला हमारे देश के आसपास के हिंद महासागर क्षेत्र आई ओ आर में एक नेटवर्क स्थापित करने की मंशा से संबंधित हैं। इस माले की प्रत्येक मोती एक स्टिंग के साथ स्थानों की एक श्रृंखला में अस्थाई चीनी सैन्य स्थापना क्षेत्र के रूप में प्रतिस्थापित होना है। हमारे देश के चारों ओर हाल ही में बंदरगाहों का विकास हुआ है म्यांमार में बंगाल की खाड़ी के तट पर ग्वादर, हंबनटोटा, सितवे आदि में मोतियों की एक स्ट्रिंग के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि यह बंदरगाह व्यवसायिक हैं फिर भी चीन के विस्तार वादी नीति का एक कड़ी है जो कि भारत को समय के अनुसार घेरने का एक अड्डा हो सकता है। तभी तो मीडिया ने इस घेरे को “स्ट्रिंग आफ पर्ल्स” नाम दिया था इस शब्द का प्रयोग चीनी सरकार की अधिकारिक स्रोतों से कभी नहीं आया, यह अक्सर भारतीय मीडिया में प्रयोग किया जाने वाला शब्द मात्र हैं, या चीन के प्रति हमारी नजरिया।1 हिंद महासागर आदि अनादि काल से भारत का एक अभिन्न अंग रहा है, जिसका प्रमाण हमें पुराणों में भी मिलता है तथा अंग्रेजी हुकूमत तक यह बरकरार रहती है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी महत्ता प्रकाश में आती है कि व्यवसायिक दृष्टि में इस मार्ग से 90% मार्ग सुलभ रूप से प्राप्त हो रही है। जिसका उपयोग चीन के ऊर्जा क्षेत्र में बढ़त का भाग या उसके विस्तार वादी नीति का हिस्सा जो कि भारत के लिए सुरक्षा दृष्टि से चिंता का विषय बना हुआ है।