Published December 31, 2022 | Version v1

रामायण में वर्णित पशुधन के प्रति तात्कालिक मानवीय मनोवृति

  • 1. सहायक आचार्य (हिंदी विभाग) आई०ई०सी० विश्वविद्यालय, बद्दी, हिमाचल प्रदेश

Description

यह समीक्षात्मक शोध वाल्मीकि रचित रामायण में उस समय पशुओं की वास्तविक स्थिति को जानने के लिए लिखा गया है ताकि वर्तमान में जनमानस तक पशुओं की उपादेयता का संदेश पहुँच सके | रामायण के अध्ययन से पता चलता है कि वाल्मीकि द्वारा   रामायण में पशुओं को विशेष स्थान प्रदान किया गया है | रामायण में वर्णित पशुओं की दशा उनकी उपादेयता को आज भी संवर्धन प्रदान कर रही है | कोई भी शुभ कार्य, गृह परिवेश, व्यापार का क्षेत्र या फिर रणभूमि हर जगह पशुओं को बहुत महत्व प्रदान किया जाता था | कुछ पशु जैसे गाय स्वयं देवताओं के समकक्ष पूज्यनीय थे | उस समय रामायण में भांति भांति  के जानवरों का वर्णन स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी ने वानर रुपी हनुमान, रीछ रुपी जामवंत, पक्षिराज गिद्ध जटायु तथा अन्य जीवों को जो महत्त्व दिया है वो आज भी हम मनुष्यों को आदर्श स्वरूप प्रदान करता है |

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