दलित पैंथर के संस्थापक ज.वि.पवार से राजश्री सैकिया की बातचीत
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ज. वि. पवार दलित-पैंथर के संस्थापकों में एक रहे हैं। इस संगठन ने 1980 के दशक के शुरूआती वर्षों में अपनी गतिविधियों से भारत ही नहीं, दुनिया भर का ध्यान खींचा था। इसी संगठन को दलित-साहित्य का जनक भी माना जाता रहा है। लेकिन तथ्य यह है कि “दलित-साहित्य” ही “दलित-पैंथर” का जनक रहा है। पवार एक कौंध की तरह यह ध्यान दिलाते हैं कि संगठन और आंदोलन से पहले साहित्य है, इसलिए दलित-साहित्य को अधिक अहमियत दी जानी चाहिए। यह सब कैसे शुरू हुआ, कैसे तत्कालीन सरकार ने इस संगठन को पंगु बना डालने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया और दलित साहित्य की मूल अवधारणा क्या रही है, आदि प्रश्नों पर दलित साहित्य अध्येता व युवा आलोचक राजश्री सैकिया ने ज वि पवार से बातचीत की।
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