Published December 27, 2021 | Version v1

दलित पैंथर ने दलित साहित्य का भूमंडलीकरण किया: दलित पैंथर के संस्थापक जेवी पवार

Authors/Creators

  • 1. Assam University

Contributors

Related person:

Description

जेवी पवार दलित-पैंथर के संस्थापकों में एक रहे हैं। इस संगठन ने 1970 के दशक के शुरूआती वर्षों में अपनी गतिविधियों से भारत ही नहीं, दुनिया भर का ध्यान खींचा था। इसी संगठन को दलित-साहित्य का जनक भी माना जाता रहा है। लेकिन तथ्य यह है कि “दलित-साहित्य” ही “दलित-पैंथर” का जनक रहा है। पवार एक कौंध की तरह यह ध्यान दिलाते हैं कि संगठन और आंदोलन से पहले साहित्य है, इसलिए दलित-साहित्य को अधिक अहमियत दी जानी चाहिए। यह सब कैसे शुरू हुआ, कैसे तत्कालीन सरकार ने इस संगठन को पंगु बना डालने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया और दलित साहित्य की मूल अवधारणा क्या रही है, आदि प्रश्नों पर दलित साहित्य अध्येता व युवा आलोचक राजश्री सैकिया ने जेवी पवार से बातचीत की।

Notes

अगर दलित पैंथर नहीं होता तो इतनी जोर से दलित साहित्य भी नहीं आता, यह बात सच है। लेकिन हम से पहले दलित साहित्य था, उसके बाद दलित पैंथर हुआ। हम लोग मानते हैं दलित साहित्य पहले था इसलिए उसे ज्यादा अहमियत देनी चाहिए। भले ही कुछ लोग भागने वाले थे फिर भी जो पहले लड़ते थे, उनमें दलित पैंथर आने से और ताकत आ गई। लेकिन एक बात कहूंगा कि अब हम 'दलित' नहीं रहे। जैसे कि अमेरिका में जो काले लोग थे उनका नारा 'ब्लैक इज ब्यूटी' था, अब वह नारा बदल कर "ब्लैक इज पावर" हो गया है। ऐसे ही हम भी अब विचार कर रहे हैं अब हम भी 'दलित' नहीं रह गए। अब हम दलित साहित्य नहीं कहते, अंबेडकरवादी साहित्य कहते हैं- ज. वि. पवार .

Files

दलित पैंथर ने दलित साहित्य का भूमंडलीकरण किया_ दलित पैंथर के संस्थापक जेवी पवार.pdf

Additional details