Published March 31, 2017
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संत बेनामी जी के काव्य का अभिव्यंजना-कौशल
Description
किसी भी साहित्य के भाव पक्ष (अभिव्यक्ति पक्ष) और कला पक्ष (अभिव्यंजना-पक्ष) अनिवार्यतः स्वीकार किए गए हैं। भाव पक्ष अथवा अभिव्यक्ति पक्ष मंे रचनाकार अपने भावांे को जनमानस तक पहुँचाता है। दूसरे शब्दांे, में यदि कहें तो यह कह सकते हैं कि रचनाकार अपनी रचना के माध्यम से जो संदेश समाज को देना चाहता है, उसे ही अभिव्यक्ति पक्ष माना जाता है। यह विदित तथ्य है कि प्रत्येक रचना का कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है। यह उद्देश्य भाव पक्ष की पूर्णता पर ही आधारित होता है। भाव पक्ष किसी भी रचना का अनिवार्य अंग माना जाता है।