तुस्तो, दिबालिवूट तूज में आप सभी का स्वाबत है, आईए, इस वीडियो दूर, बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बालिवूट की बा
अगस्ते और लूईज लुमीर बतर, अपनी पहली फ्रेंज फ्रेंज फ्रेंज फ्रेंज जेसका अंग्रेजी शिष्चक था, वरकर्स लिविंग दे लुमीर फ्रेक्टे, और जो केवल फ्रोटी शिक सेकंट्स की फ्रिंटी, इस फिल्म से उनोने चित्रो की दून्या में
से, केवल हम परीची ती नहीं, बलकी निरन्तन आदान प्रदान्च से जुडे थे अगले ही वर्ष आटी न्टी शिक्स में, लुमीर बतर ने भुमबे आजके मुम्मँए में पहली चल चित्र दर्षाए थे, हिन्दूस्तान की कुछ आम जन्ता, शुरु में इस मायवी �
मुल के नागरीको को भी बड़े के साच साथ, उसके पीषे के दुन्या की और उस्त्त्ता पर दिले है, तीन में, उन्नीसो थ देरा के, महराष्ट्र के की वक, श्री दादा साए प्फालके ने, पहली बार, बारत वर्ष के यस सुप्तन नागरी के दुर को खोल के, सिन्मा
बाहली मोऊषन प्रली, जो राजा हरिच्चन्डर की जीवनी बे आदारेच ती, पूरी तरहनिर्मित, बारत्या कलाकार और खॉज्वारा की लेए, बारत्ये सिन्मा की काल्पनिक जोड प्रज्विलित करके, दादा साए मनोर अंजन की दुन्याग में, मानो क्रान्ती ले
प्रज्वरुप इस्विल्म में अभीनेट्री के पात्रभी पूरुष कलाकारो को ही निबाने बड़े,
बाल गंदर एक एसा ही नाम था, एक पूरुष नाराएंच श्रीपद राजान्स, जिस ने अपने महिला पातो की बज़से असीम ख्याती प्राप की,
दादा साहेप को अनेक दिक्कतो का सामना करना पड़ा, पर अपनी सारी पूंजी अर पतनी के गहने तक दावपे लगाने के बाद, वे कहापिषियाटने वाले थे,
उनो अपना ही सपना साकार नहीं किया, बलकी एस सवपननगरी को मानो एक आकार तिया,
एक बार फिर से तोबारा क्रान्तिया, 1933 में निर्माता अदेशिर एरानी की फिल्म आलम आरासी, अब तक का मुख, बुंगा चल चित्र है, इस फिल्म से बोलने लगा,
इस दरबार में भीडिक यस्मक बनाई जाती है, तुटा दिल जोडा जाता है,
साँन तेकनोलोगी अब पष्ची में फिल्मों के बाद, बारतिया फिल्मों में भी अपनाई गई, गीछ संगीट का सिनमा में प्रचलन जोड बगरने लगा,
देखते ही देखते, हिंदुस्तानी फिल्मों की लेहर सी आगए,
बारतिया संसकुरती इतिहास से प्रेरिथ होगे फिल्मे बनाई जाने लगा, सेनेमा अब उद्योग का रूप लेने लगा, और काई फिल्म् कंप्रियों की स्तापना होगे,
प्रभा स्तुड्योग, मिनर्वा मिल्टोन, अंजी स्तुड्योग, नूग्खेटर इत्यादी, एन फिल्म कंप्रियों ने मुख्ये कलाकारों को मान्सिक महंताने पे रखना शुर। किया,
अग्डियोग को आपनी रबने अग्डियों के प्रभावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावा�
अपनी गाएकी की बजे से सुपस्टार बन के अबरे, लोग उनके दिवाने होगाए.
नूर जाहा की आवाज ने पूरे जाहा को मंत्र मुख कर दिया,
दर भागे वर्ष पाटिशन के बाद वो पाकिस्टान चलेगे, बोमेड तोकिस के निरमाता, हिमान्शु राय की पतनी देविकर अनी, अपनी खुबसुरती, बेमिसाल आदाय की बज़ासे, लोगो के दिलो पेराज करतेते,
बोलिवूड के दादा मुनिष्री आशोग कुमार को भी, फिलम अछुट कन्या में पहली बार बतोर नायक, देविकर अनी जी के समक्ष काम मिला, और उनन अदने गाने भी खुदी गाए थे, गानो के पिक्चुराइजेशिन का दंग बड़ा रुमान्चित हूँए करता
थेर प्लेबैक सिंगिंग का प्रच्लन शुरोगा, यानी, दर्षोक लेद दुगनार, परदे पे चाहीते आभीने ता, और गानो के लिए चाहीती आवास, पहली बार, नूग ठीटस की बेंगोली फिल्म, बागये चक्रा, जो नितिन भोस दूरा निर्देशित थी, उस्
वानन, और राज्कपूर का बागये उदै, इसी कमप्लिट वाना तुवा, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, निर्देशित, नि
विज़ाजम जैसी निर्देशित, भिल्मों में आभेने किया, देवानन भी जेद्दीद, काला बजार, रुर्ट्गों बाइप जैसी पुख्णों से जन्तापुड़।
