विश्व के हर देश में दिव्यांग होने से जीवन पर असर पड़ता है, रोज माद्रा के काम बोज से लगते है, आत्मन निरभर होना चुनाउती बन जाता है, रोजगार मिलना पसमबज़ा लगता है, लोगों के ताने और तकी अनुज़ी बाते चुग्ती, एसे में पार
आत्मन निरभर लगते है, तुश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
जो लोगते है, विश्व के लगते है, लोगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
विश्व के लगते है, विश्व के लगते है,
